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ज़कात किस पर फ़र्ज़ है, और कितनी देनी होती है?

ज़कात इस्लाम के पाँच अरकान में से एक है। यह उन पर फ़र्ज़ है जिनके पास निसाब के बराबर या ज़्यादा दौलत एक क़मरी साल तक रहे।

ज़कात किस पर फ़र्ज़ है

  1. मुसलमान, बालिग़ और आक़िल हो।
  2. ज़कात वाली दौलत निसाब के बराबर या ज़्यादा हो — आज चाँदी के हिसाब से ₹1,22,411।
  3. वह दौलत एक क़मरी साल तक निसाब से ऊपर रही हो।

कितनी ज़कात देनी होती है

₹1,00,000 कुल दौलत पर₹2,500
₹5,00,000 कुल दौलत पर₹12,500
₹10,00,000 कुल दौलत पर₹25,000

किन चीज़ों पर ज़कात है

नक़द, बैंक बैलेंस, FD/RD, सोना-चाँदी, शेयर और म्यूचुअल फ़ंड, क्रिप्टो, कारोबार का माल, और वह पैसा जो आपको वापस मिलना है।

किन पर नहीं

रहने का घर, इस्तेमाल की गाड़ी, घर का सामान और कपड़े। PF/PPF जब तक निकाल न सकें, बहुत से उलमा की राय में शामिल नहीं — निकालने पर हिसाब में आता है।

ज़कात किसे दे सकते हैं

क़ुरआन (9:60) में ज़कात के हक़दार बताए गए हैं — जैसे फ़ुक़रा (ग़रीब), मसाकीन (मोहताज), क़र्ज़दार और मुसाफ़िर। आम राय में अपने माँ-बाप, औलाद, या शौहर/बीवी को ज़कात नहीं दी जाती।

और गाइड

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Zakatify एक-एक सवाल पूछकर हिसाब करता है — कैरेट के हिसाब से सोना, बचत, निवेश, क़र्ज़ — आपके शहर के आज के रेट के साथ। मुफ़्त, निजी, भारत के लिए बना।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या नौकरी वाले पर ज़कात है?

तनख़्वाह पर अलग से नहीं। साल पूरा होने पर जो बचा है (बैंक, नक़द, FD, सोना) अगर निसाब के बराबर या ज़्यादा है, तो उस पर 2.5%।

ज़कात कब देनी चाहिए?

जब निसाब पर एक क़मरी साल गुज़र जाए। बहुत लोग रमज़ान में एक तारीख़ तय कर लेते हैं और हर साल उसी दिन हिसाब करते हैं।

क्या ज़कात थोड़ी-थोड़ी करके दे सकते हैं?

हाँ। बहुत से लोग साल भर में थोड़ा-थोड़ा देते हैं और Zakatify में हिसाब रखते हैं कि कितना बाक़ी है।